CACTUS KE PHUL (Poems)

प्राक्कथन

कविता का विस्फोट हमारे मन में घटित हुआ दस साल पहले। अचानक व्यक्तित्व में जादुई हलचल को लेकर संस्कार और मान्याताओं को चीरते हुए कई इंद्रधनुष और गुलशन उगाते हुए. कैक्टस और झाड़ियों की कंटीली बाहों में सिमटे हुए. बीज और मूल शायद मेरी मनोभूमि और अब चेतन में सालों से पल रहे थे. मेरे साहित्य प्रेम और अध्यन से सिंचित और विज्ञानं और दर्शन की खाद से समृद्ध। फिर कुछ फुल खिले मेरे चलचित्र, लेखन और निर्देशन में.
लोक कला में कविता, गीत और कहानी का उपयोग हजारों साल से चला आ रहा है. कविता, श्लोक और दोहे के रूप में हमारे धर्मशास्त्र हजारों साल से लिखे जा रहे हैं. जैसे भगवत गीता एक गीत है श्लोक के रूप में और शायद इसलिए इतनी प्रभावशाली है. कविता के कितने आकार और आयाम हैं, लेकिन छंद और संगीत से बंधे हुए जैसे सॉनेट, शेर, दोहा या हाइकू (जापानी नन्ही कविता) और न जाने कितने छंदो के प्रकार। उर्दू और पारसी में शेर, गजल, नाथ, कवाली और नज़्म और नगमा; लेकिन सब प्रेम, सौंदर्य और भक्ति से लवरेज। आधुनिक कविता में मुक्त छंद और गद्य-काव्य ‘फ्री’ और ‘ब्लेंक’ वर्ष, पॉम और प्रोस आदि छा गए सौ-दोसो साल में. शेक्सपिअर के नाटकों में गद्य और काव्य दोनों का समान उपयोग हुआ.
ये रचनाएं मेरे दिल के टुकड़े हैं और इन्हे प्यार से परखकर संभालेंगे आप, एहि मेरा अनुरोध है.